अफीम नहीं, असली कमाई यहां से कर रहा तालिबान!एक्सपर्ट ने बताया, आगे कैसी होगी राह
नंदिता सेनगुप्ता, काबुल अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद सबसे ज्यादा चिंता जताई गई उसके हाथ लगने वाले खजाने की। पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा अफीम की खेती अफगानिस्तान में होती है और ऐसे में सवाल उठने लगे कि तालिबान इस व्यापार को कैसे आगे ले जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के ऑफिस ऑन ड्रग्स ऐंड क्राइम की रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश की GDP का 11% अफीम की खेती से ही आता है। इसके मुताबिक इस पर टैक्स लगाकर तालिबान मोटी रकम कमाता है। हालांकि, कई साल से देश में ग्रामीण रोजगार और पॉपी (Poppy) उत्पादन को स्टडी कर रहे सामाजिक-अर्थशास्त्री डेविड मैन्सफील्ड का कहना है कि तालिबान के पास अफीम के अलावा भी कमाई के कई साधन हैं। तालिबान लगाएगा अफीम की खेती पर बैन? डेविड ने बताया है कि तालिबान इसके उत्पादन पर प्रतिबंध शायद ही लगाएगा क्योंकि पिछली बार सरकार में आने पर उसने ऐसा ही किया था और लोगों को नाराज कर दिया। इसके बाद की हामिद करजई सरकार में वह खुद किसानों और खेती का शुभचिंतक दिखाया और उनका समर्थन जीता। अब भले ही वह प्रतिबंध की बात करे लेकिन सच्चाई कुछ और हो सकती है। तालिबान के अंदर भी कई धड़े हैं और अब तक वे मिलकर लड़ते रहे। अब जब उनके सामने एक दुश्मन नहीं है तो आपस में मतभेद सामने आने लगे हैं। बढ़ेगी अफीम की खेती? डेविड का मानना है कि तालिबान के शासन में आने से अफीम की खेती बढ़ेगी नहीं क्योंकि इससे पहले भी 75% जमीन सरकार के अंदर थी ही नहीं। हालांकि, उन्होंने बताया है कि देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगने के कारण अर्थव्यवस्था के चरमराने से और विदेशी सहायता नहीं मिलने से अफीम की खेती बढ़ सकती है। अर्थव्यवस्था को नुकसान से लोगों की नौकरियां गईं तो वे गांवों को लौटेंगे। इससे वे कम वेतन पर मजदूरी करेंगे और ऐसे में खेती बढ़ेगी। इसलिए उत्पादन कम करने के लिए आर्थिक मजबूती बहुत जरूरी है। कैसे खत्म होगा नशे का कारोबार? अफीम की खेती में बहुत मेहनत लगती है। इसलिए जब लोगों के पास दूसरा विकल्प होता है तो वे इसे बंद कर देते हैं। डेविड बताते हैं कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए 1990 में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया है जिसमें 1.6 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया गया था, अगर तालिबान और स्थानीय समुदाय उत्पादन बंद कर दे। हालांकि, इसका फायदा नहीं हुआ। इसे विकास के जरिए ही खत्म किया जा सकता है। असल में तालिबान की कितनी कमाई? डेविड का कहना है कि UNODC के आंकड़ों में अफगानिस्तान के टैक्स सिस्टम को गलत समझा गया है। इसमें बताया गया है कि तालिबान सप्लाई चेन के हर चरण पर 10% टैक्स लगाता है लेकिन असल में टैक्स जमीन की यूनिट और मात्रा पर टैक्स लगाता है, कीमत पर नहीं। कीमत के मुकाबले में यह 3% होता है। हेरोइन या मेथ के उत्पादन में ज्यादा मुनाफा नहीं होता है। अगर तालिबान 10% टैक्स लगाए तो उत्पादक को नुकसान ही होगा क्योंकि उत्पादन की कीमत बहुत होती है। ऐसे में सालाना 40 करोड़ डॉलर की कमाई मुमकिन नहीं है। कहां से आता है पैसा? उनका कहना है कि साल 2020 में तालिबान की अफीम से कमाई 2 करोड़ डॉलर रही होगी। इससे ज्यादा वह वैध सामान के क्रॉस-बॉर्डर टैक्स पर कमा लेता है। डेविड ने बताया है कि अफगानिस्तानी सीमा के रास्ते व्यापार चल रहा है। ईरान, पाकिस्तान और मध्य एशिया के साथ सामान का व्यापार किया जा रहा है, शायद पाकिस्तानी रुपये जैसे मुद्राओं में। इसके साथ अफीम और खनन की कमाई मिलाकर भी तालिबानी सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सर्विसेज मुहैया नहीं करा पाएगा।
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अफीम नहीं, असली कमाई यहां से कर रहा तालिबान!एक्सपर्ट ने बताया, आगे कैसी होगी राह
Reviewed by SURFING CREATIONS
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September 22, 2021
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