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श्याओमी का मार्केट शेयर चीन में 11%, पर भारत में 30%; ओप्पो-वीवो का मार्केट शेयर भारत में तो बढ़ रहा, लेकिन चीन में घटता जा रहा

लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी के पास भारत-चीन की सेनाओं के बीच जारी तनाव को अब दो महीने होने वाले हैं। दोनों देशों की सेनाओं के बीच 15 जून को हिंसक झड़प भी हो गई। भारत में सरकार ने चीन की 59 ऐप्स को राष्ट्रीय सुरक्षा और प्राइवेसी के लिए खतरा बताते हुए बैन कर दिया।

सोशल मीडिया पर पिछले दो महीनों से तो चीनी प्रोडक्ट्स को बायकॉट करने की मुहिम चल ही रही थी। और अब ऐप्स पर बैन लगने के बाद चीन की स्मार्टफोन कंपनियों पर भी रोक लगाने की मांग उठने लगी है।

लेकिन, सच तो ये है कि चीन की स्मार्टफोन कंपनियों का मार्केट शेयर भारत में कम होने की बजाय लगातार बढ़ते ही जा रहा है। स्मार्टफोन मार्केट पर रिसर्च करने वाली काउंटरप्वाइंट की रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल की पहली तिमाही (जनवरी से मार्च) में चीन की 4 कंपनियों का मार्केट शेयर 55% था, जो इस साल की पहली तिमाही में बढ़कर 73% हो गया।

ये 4 कंपनियां हैं- श्याओमी, ओप्पो, वीवो और रियलमी। ये चारों कंपनियां भले ही चीन की हों, लेकिन इन्हें चीन में ही इतना पसंद नहीं किया जाता। इतना ही नहीं, ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में तो इनकी हालत और भी ज्यादा खराब है।

इसका मतलब तो यही हुआ कि चीन के लोग ही चीनी कंपनियों के प्रोडक्ट्स को नहीं खरीदते हैं।

सबसे पहले बात चीन की कंपनियों की चीन में हालत की
चीन की एक कंपनी है हुवावे। चीन की यही इकलौती कंपनी है जिसकी हालत सबसे बेहतर है। ग्लोबल मार्केट में भी हुवावे मार्केट शेयर के मामले में दूसरे नंबर पर है।

लेकिन, श्याओमी, ओप्पो और वीवो की हालत वहां खराब होती जा रही है। रियलमी को तो वहां अन्य कंपनियों में गिना जाता है। चीन में श्याओमी, ओप्पो और वीवो का मार्केट शेयर 2019 की पहली तिमाही में 49% था, जो 2020 की पहली तिमाही में घटकर 43% पर आ गया।

अब देखिए भारत में चीनी कंपनियों की हालत
भारत में चीनी कंपनियों की हालत चीन और ग्लोबल मार्केट के मुकाबले काफी ज्यादा बेहतर है। हमारे यहां 73% स्मार्टफोन मार्केट पर चीनी कंपनियों का ही कब्जा है। सिर्फ एक सैमसंग है, जो टॉप-5 में है। सैमसंग भी पिछले साल दूसरे नंबर पर थी और अब तीसरे पर आ गई है। सैमसंग दक्षिण कोरियाई कंपनी है।

इतना ही नहीं, हमारे देश में चीनी कंपनियों की हालत पहले से भी बेहतर होती जा रही है। 2019 की पहली तिमाही में चीन की चार कंपनियों श्याओमी, वीवो, ओप्पो और रियलमी का मार्केट शेयर 55% था और अब 73% है। यानी एक साल में इनका मार्केट शेयर 18% बढ़ गया।

ग्लोबल मार्केट में क्या है चीनी कंपनियों की हालत
दुनियाभर के स्मार्टफोन मार्केट में सिर्फ हुवावे को छोड़कर और किसी चीनी कंपनी का मार्केट शेयर 10% से ज्यादा नहीं है। हुवावे का मार्केट शेयर 17% है। जबकि, श्याओमी, ओप्पो, वीवो और रियलमी का मार्केट शेयर 27% है।

हालांकि, पिछले साल से तुलना करें तो ग्लोबल मार्केट में चीनी कंपनियों का शेयर बढ़ा है। ग्लोबल मार्केट में दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग का मार्केट शेयर सबसे ज्यादा 20% है। दूसरे नंबर हुवावे है और तीसरे पर अमेरिकी कंपनी एपल है। एपल का मार्केट शेयर 14% है।

2020 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट घटी
कोरोनावायरस का असर मोबाइल शिपमेंट पर भी दिखा। इस साल की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच मोबाइल शिपमेंट में गिरावट आ गई। 2019 की आखिरी तिमाही की तुलना में इस साल की पहली तिमाही में सभी स्मार्टफोन कंपनियों की शिपमेंट में गिरावट देखी गई।

सैमसंग ने 2019 की आखिरी तिमाही में दुनियाभर में 7 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन भेजे थे, जबकि 2020 की पहली तिमाही में उसने 5.86 करोड़ स्मार्टफोन ही भेजे। इसी तरह एपल ने भी चौथी तिमाही में 7 करोड़ से ज्यादा मोबाइल शिपमेंट किए थे। और 2020 की पहली तिमाही में 4 करोड़।



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श्याओमी का मार्केट शेयर चीन में 11%, पर भारत में 30%; ओप्पो-वीवो का मार्केट शेयर भारत में तो बढ़ रहा, लेकिन चीन में घटता जा रहा Reviewed by SURFING CREATIONS on July 02, 2020 Rating: 5

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