अफगानिस्तान में चलेगा सिर्फ शरिया कानून, सरकार गठन के बाद बोला तालिबानी 'सुप्रीम लीडर'
काबुल तालिबान के प्रमुख नेता हैबतुल्ला अखुंदजादा ने कहा है कि लागू होगा। तालिबानी नेता की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भविष्य में अफगानिस्तान की सरकार और आम जीवन से जुड़े सभी मुद्दों को शरिया के कानूनों से हल किया जाएगा। अखुंदजादा ने कहा कि अफगान अधिकारी 'इस्लाम के अनुसार' मानव और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के लिए गंभीर कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि नए अफगान अधिकारी देश में निवेश के लिए विदेशियों को अवसर मुहैया कराएंगे। बेरोजगारी से निपटेगी तालिबान सरकारअखुंदजादा ने अपने बयान में कहा कि (तालिबान व्यवस्था में अफगानिस्तान का नया नाम) सुरक्षा को मजबूत करने के अलावा अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक शक्ति और विकास के लिए करेगा। उन्होंने कहा कि यह घरेलू राजस्व को पारदर्शी तरीकेसे प्रबंधित करेगा, अंतरराष्ट्रीय निवेश और व्यापार के लिए अलग-अलग क्षेत्रों को विशेष अवसर देगा और बेरोजगारी से प्रभावी तरीके से निपटेगा। पड़ोसी देशों के साथ बनाना चाहते हैं अच्छे संबंधअखूंदजादा ने कहा कि नए अफगान अधिकारियों का मकसद जल्द से जल्द देश को उसके पैरों पर खड़े करना और पुनर्निर्माण करना है। हम अपने पड़ोसी और अन्य देशों के साथ मजबूत और अच्छे संबंध बनाना चाहते हैं। इन देशों के साथ हमारे रिश्ते अफगानिस्तान के हित और लाभ पर आधारित होंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समझौतों, प्रस्तावों और जिम्मेदारियों के लिए प्रतिबद्ध हैं जो इस्लामी कानून और राष्ट्रीय मूल्यों का खंडन नहीं करते हैं। हसन अखुंद को मिली सरकार की कमानतालिबान ने आखिरकार अफगानिस्तान में इस्लामिक अमीरात सरकार का ऐलान कर दिया है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंधित आतंकी हसन अखुंद को अफगानिस्तान का नया कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाया गया है। जबकि, इस पद के लिए पिछले 20 दिनों से चर्चा में सबसे आगे रहे मुल्ला अब्दुल गनी बरादर को एक अन्य नेता के साथ उप प्रधानमंत्री बनाया गया है। तालिबान की नई कैबिनेट में सबसे चौंकाने वाले दो नाम भी शामिल हैं। इसमें कुख्यात आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के सरगना को अफगानिस्तान का आतंरिक मंत्रालय सौंपा गया है, जबकि रक्षा मंत्री के रूप में मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को नियुक्त किया गया है। क्या है शरिया कानूनशरिया कानून या इस्लामिक कानून मुसलमानों के धार्मिक रिति रिवाजों से जुड़े नियम है जो इस्लाम की परंपरा का हिस्सा हैं। मुख्यतौर पर कुरान और हदीस इसके मुख्य स्रोत होते हैं। अरब में शरिया का मतलब भगवान के नियमों से होता है। ऐतिहासिक तौर पर देखें तो शरिया कानून या नियमों को व्यक्तिगत रुप से मुफ्ती ही लागू करते हैं इनके द्वारा दी गई राय को पुराने समय में राजा के द्वारा नियुक्त जज मानते थे और आदेश सुनाते थे। आज भी कई जगह मुफ्ती शरिया के मुताबिक फतवा जारी करते हैं। शरिया कानून मुख्य रुप से अरब और मुस्लिम देशों में लागू हैं सऊदी अरब, कतर, यमन, ब्रूनेई, पाकिस्तान, ईरान, इराक और अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू हैं। शरिया मुसलमानों के जीवन का अहम हिस्सा है मुसलमान को शरिया के मुताबिक ही अपना जीवन बिताना होता है। शरिया में चोरी के अपराध में हाथ काटे जाते हैं जबकि कुरान का निरादर करने पर मौत की सजा भी दी जा सकती है। इसके अलावा अगर कोई मुसलमान धर्म को छोड़कर दूसरा धर्म अपनाता है तो भी उसे मौत की सजा हो सकती है।
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अफगानिस्तान में चलेगा सिर्फ शरिया कानून, सरकार गठन के बाद बोला तालिबानी 'सुप्रीम लीडर'
Reviewed by SURFING CREATIONS
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September 07, 2021
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