9/11 हमला : अधिकारी ने बुश के कान में फुसफुसाए 11 शब्द और बदल गया इतिहास, देखें तस्वीरें
वॉशिंगटनदुनिया के सबसे ताकतवर शख्स के लिए वह दिन आम दिनों जैसा था। वॉशिंगटन डीसी से करीब एक हजार मील दूर फ्लोरिडा के एक स्कूल में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश का कार्यक्रम था। बुश और बच्चों के बीच खुशनुमा संवाद चल रहा था। तभी वाइट हाउस के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ एंडी कार्ड आते हैं और बुश के कान में कुछ फुसफुसाते हैं। वे तेजी से बाहर निकल जाते हैं। एक बार फिर सब कुछ पहले की रफ्तार से चलने लगता है। बच्चों से संवाद का सिलसिला आगे बढ़ता है। कुछ ही देर बाद चेहरे पर तैर रही बेचैनी को छिपाए कार्ड फिर क्लास में दाखिल होते हैं। इस बार वह बुश के कान में बेहद नाप-तौल कर 11 शब्द कहते हैं। किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के दिमान को सुन्न कर देने वाले 11 शब्द। बुश की आंखों में खौफ और क्रोध का मानों जलजला सा फूट पड़ता है।9/11 Attack : न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर पर हुए हमले को आज 20 साल हो चुके हैं। हमले में करीब 3000 लोगों ने जान गंवाई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। हमला इतना भीषण था कि कई लोग बचने के लिए बिल्डिंग से नीचे कूद गए।

वॉशिंगटन
दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स के लिए वह दिन आम दिनों जैसा था। वॉशिंगटन डीसी से करीब एक हजार मील दूर फ्लोरिडा के एक स्कूल में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश का कार्यक्रम था। बुश और बच्चों के बीच खुशनुमा संवाद चल रहा था। तभी वाइट हाउस के तत्कालीन चीफ ऑफ स्टाफ एंडी कार्ड आते हैं और बुश के कान में कुछ फुसफुसाते हैं। वे तेजी से बाहर निकल जाते हैं। एक बार फिर सब कुछ पहले की रफ्तार से चलने लगता है। बच्चों से संवाद का सिलसिला आगे बढ़ता है। कुछ ही देर बाद चेहरे पर तैर रही बेचैनी को छिपाए कार्ड फिर क्लास में दाखिल होते हैं। इस बार वह बुश के कान में बेहद नाप-तौल कर 11 शब्द कहते हैं। किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के दिमान को सुन्न कर देने वाले 11 शब्द। बुश की आंखों में खौफ और क्रोध का मानों जलजला सा फूट पड़ता है।
चार कमर्शियल विमान बने मिसाइल

एंड्रयू कार्ड उस दिन को याद करते हुए कहते हैं कि उस घटना ने सभी को 'एकजुट' कर दिया। उस दिन न ही कोई रिपब्लिकन था, न डेमोक्रेट, सभी अमेरिकी थे। करीब दो दशक पहले 11 सितंबर की सुबह अल-कायदा के 19 आतंकवादियों ने अमेरिका की दो सबसे ऊंची इमारतों पर हमला करने के इरादे से कैलिफोर्निया जाने वाली चार कमर्शियल फ्लाइट्स को हाईजैक कर लिया था। आतंकियों ने इन विमानों का इस्तेमाल मिसाइल की तरह किया गया। दो विमानों ने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की दो इमारतों और एक विमान ने अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन को निशाना बनाया। एक चौथा विमान अपने टारगेट से पहले ही पेन्सिलवेनिया के एक खेत में गिर गया। इस आतंकी हमले में करीब 3000 लोग मारे गए थे और असंख्य लोग घायल हुए।
क्या थे वे 11 ऐतिहासिक शब्द

पहले प्लेन के टकराने के बाद बुश और फ्लोरिडा के उस स्कूल में मौजूद उनके स्टाफ ने स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं लगाया। जब कार्ड को दूसरे प्लेन के टकराने की सूचना मिली तब उन्हें समझ आया कि यह कोई दुर्घटना नहीं बल्कि आतंकवादी हमला है। उन्हें पता था कि बच्चों के बीच बैठे बुश उनसे बात नहीं कर पाएंगे लेकिन उन्हें इस बारे में सूचित किया जाना बेहद जरूरी था। उन्हें पता था कि वह बोलने जा रहे हैं, उन्होंने क्लास का दरवाजा खोला, बुश के पास गए और झुककर उनके काम में बोला- A second plane hit the second tower america is under attack यानी 'एक दूसरा प्लेन दूसरे टॉवर से टकरा गया है अमेरिका पर हमला हुआ है।'
उस दिन पता चला राष्ट्रपति होने का 'बोझ'

कार्ड MSNBC से बात करते हुए कार्ड कहते हैं, 'यह बोलकर मैं पीछे हट गया। मैंने उन्हें बेहद असाधारण मैसेज दिया था। यह एक ऐतिहासिक मैसेज होने वाला था। मैं जानता था कि वह ऐसी जगह मौजूद हैं जहां वह चाहकर भी सवाल नहीं पूछ पाएंगे लेकिन मुझे उम्मीद थी कि वह समझ जाएंगे कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उन्हें क्या करना है।' कार्ड कहते हैं, 'मुझे लगता है कि उस दिन बुश को राष्ट्रपति होने की असल जिम्मेदारी का अहसास हुआ।' आज उस हमले को करीब 20 साल हो चुके हैं। न्यूयॉर्क में बने 9/11 मेमोरियल में कुल 2983 लोगों के नाम लिखे हुए हैं, जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई। इस हमले ने न सिर्फ अमेरिका के वर्तमान को चोट पहुंचाई बल्कि उसके आने वाले कल को भी बदल दिया। ऐसे कई बच्चे जो हमले के वक्त अपनी मां के पेट में थे, कई महीनों बाद जब पैदा हुए तो अपने पिता को खो चुके थे। लोग अपने परिजनों को बिल्डिंग से कूदकर मरता हुआ देख रहे थे लेकिन वे कुछ नहीं कर पा रहे थे, हालांकि अमेरिका बदला लेने की सोच चुका था।
अमेरिका ने लिया हमले का बदला

इस हमले के बाद अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी जंग की शुरुआत की। बड़ी संख्या में नाटो सैनिक अफगानिस्तान में उतार दिए गए। इसमें अमेरिका सैनिक भी थे जो स्थानीय सैन्य बल की मदद और हवाई हमलों को अंजाम दे रहे थे और तुर्की के सैनिक भी थे जो आतंकियों पर कार्रवाई नहीं कर रहे थे। अफगानिस्तान में तब तालिबान का राज था और जनता त्राहि-त्राहि कर रही थी। कुछ ही महीनों में सैनिकों ने तालिबान को सत्ता से उखाड़ फेंका। अमेरिका को लगा कि तालिबान खत्म हो चुका है लेकिन तालिबान दरअसल अफगानिस्तान के ग्रामीण इलाकों में सिमट गया और छिप गया। 2001 के इस घटनाक्रम के बाद 2011 में अमेरिका ने एक लंबे ऑपरेशन के बाद ओसामा बिन लादेन को मार गिराया। अमेरिकी इतिहास के सबसे भयानक हमले के पीछे लादेन ही मुख्य चेहरा था इसलिए अमेरिका दावा कर रहा था कि उसने अपना बदला ले लिया है।
क्या सब कुछ 20 साल पहले जैसा

यही दावा अमेरिका ने 2021 में फिर एक बार दोहराया। जब उसने अफगानिस्तान से सैनिकों की वापसी की घोषणा की। अमेरिका की इस घोषणा के बाद आज सब कुछ 20 साल पीछे जाता दिख रहा है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार है जैसे 20 साल पहले थी, देश आतंकवाद के खतरे को लेकर चर्चा कर रहे हैं और अमेरिकी भारी भरकम सैन्य बल, पैसा और उपकरण अफगानिस्तान में झोंककर वापस अपने मुल्क लौट चुके हैं। 9/11 हमले के पीड़ित, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना सब कुछ गंवा चुके सैनिक और उनके परिजन और तालिबान से प्रताड़ित अफगान जनता आज खुद को हारा हुआ महसूस कर रहे हैं।
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