भारत में मिले डेल्टा वेरियंट के खिलाफ कम असरदार कोविड-19 वैक्सीन: WHO
वॉशिंगटन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि कोविड-19 के खिलाफ कम असरदार पाई जा रही हैं। हालांकि, ये मौत के खतरे और गंभीर बीमारी से बचा सकती हैं। WHO के महामारी विशेषज्ञ का कहना है कि कई म्यूटेशन होने की वजह से वैक्सीन का कोरोना वायरस के खिलाफ असर कम हो सकता है। डेल्टा प्लस वेरियंट भारत में पाए गए डेल्टा वेरियंट में हुए म्यूटेशन की वजह से बना है। वायरस के हावी होने में सक्षम स्वरूपों को एक जैविक लाभ मिलता है जो है म्यूटेशन (उत्परिवर्तन), जिसके जरिये ये स्वरूप लोगों के बीच बहुत ही आसानी से फैलते हैं। उत्परिवर्तन के कारण कम संक्रामक स्वरूप का असर भी कम होता जाता है और अधिक संक्रामक स्वरूप हावी होते जाते हैं। रूस का दावा, Sputnik असरदार रूस के डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) ने मंगलवार को दावा किया है कि रूस की स्पूतनिक V (Sputnik-V) सबसे पहले भारत में मिले डेल्टा वेरियंट (Delta Variant Coronavirus) के खिलाफ ज्यादा असरदार है। दावा किया गया है कि किसी भी दूसरी वैक्सीन के मुकाबले इस ज्यादा संक्रामक और घातक वेरियंट के खिलाफ रूस की वैक्सीन ने सबसे ज्यादा असर दिखाया है। गमलेया सेंटर स्टडी अंतरराष्ट्रीय पियर-रिव्यू जर्नल में छपेगी। वैक्सीन की दोनों खुराक जरूरी डेल्टा स्वरूप की बात करें तो, यह उन लोगों को संक्रमित कर सकता है जिन्हें कोविड-19 रोधी टीके की आधी खुराक मिली है और यही वजह है कि यह हावी हो रहा है। पब्लिक हैल्थ इंग्लैंड के मुताबिक जिन लोगों को फाइजर के टीके की दोनों खुराक मिल चुकी हैं उनका इससे बचाव 88 फीसदी तक हो सकता है लेकिन जिन्हें फाइजर या एस्ट्राजेनेका टीके की एक ही खुराक मिली है उनका केवल 33.5 तक ही बचाव हो सकेगा।
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भारत में मिले डेल्टा वेरियंट के खिलाफ कम असरदार कोविड-19 वैक्सीन: WHO
Reviewed by SURFING CREATIONS
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June 21, 2021
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